जिलेभर में भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवाल, नियमितीकरण के नाम पर भी विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म

खंडवा।
महिला एवं बाल विकास विभाग एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है। पिछले कुछ समय से विभाग से जुड़े एक के बाद एक घटनाक्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया में मेरिट सूची में बदलाव और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो कहीं सहायिका से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया विवादों में है। इसी के साथ जिले में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इन सभी घटनाक्रमों ने कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और आमजन के बीच विभाग की पारदर्शिता एवं निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
भिगावा पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार छैगांव माखन परियोजना के ग्राम भिगावा में सहायिका से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया के दौरान एक अभ्यर्थी को प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किया गया। विभागीय चर्चाओं में इसकी वजह निर्धारित समय-सीमा में अंकसूची प्रस्तुत नहीं होना सहित कुछ प्रक्रियागत कारण बताए जा रहे हैं। इसके बाद कर्मचारियों के बीच प्रक्रिया को लेकर असंतोष और आपत्तियां सामने आने की चर्चा है।
इसी बीच विभाग द्वारा नई विज्ञप्ति जारी कर 13 जुलाई तक आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार संबंधित अभ्यर्थी अब दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रक्रिया में शामिल होने का प्रयास कर रही है। भोपाल स्तर पर चर्चा के दौरान भी नियमानुसार पात्र पाए जाने पर प्रक्रिया में शामिल किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि नियमानुसार अवसर दिया जाना था तो प्रारंभिक स्तर पर भ्रम की स्थिति क्यों बनी।
भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोप
इसी दौरान जिले की एक अन्य आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया भी विवादों में आ गई है। ग्राम शिवरिया निवासी अभ्यर्थी लक्ष्मी सोनरे ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को शिकायत देकर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर रिश्वत लेकर मेरिट सूची में बदलाव करने का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार प्रारंभिक मेरिट सूची में उनका नाम प्रथम स्थान पर था, लेकिन अंतिम चयन सूची में उन्हें चौथे स्थान पर कर दिया गया। उनका आरोप है कि उनके अनुभव के अंक भी नहीं जोड़े गए, जिससे उन्हें चयन से वंचित होना पड़ा।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता के पति निखिलेश गांवड़े भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष हैं, जबकि चयनित अभ्यर्थी ज्योति जाधव के पति अनिल जाधव युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हैं। हालांकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस राजनीतिक पृष्ठभूमि और चयन प्रक्रिया के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
नियमितीकरण के नाम पर भी तेज हुई चर्चाएं
भर्ती और पदोन्नति के साथ-साथ अब संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 25 संविदा कर्मचारियों के नाम नियमितीकरण के लिए प्रस्तावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। इसी बीच कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया के नाम पर कथित रूप से वसूली का खेल चल रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि इस संबंध में पार्वतीबाई धर्मशाला में कर्मचारियों की एक बैठक आयोजित किए जाने की चर्चा रही, जिसमें नियमितीकरण प्रक्रिया और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ कर्मचारी इस संबंध में भोपाल जाकर अधिकारियों से मुलाकात करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इन चर्चाओं की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी क्रम में कर्मचारियों के बीच एक कथित वॉइस रिकॉर्डिंग भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि इसमें नियमितीकरण के नाम पर पैसों की मांग किए जाने जैसी बातें सुनाई देती हैं। हालांकि इस रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता केवल सक्षम जांच एजेंसी द्वारा ही स्थापित की जा सकती है।
विभाग का पक्ष
इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में छैगांव माखन परियोजना का प्रभार परियोजना अधिकारी श्री शिशोदिया के पास है। श्री शिशोदिया के अनुसार इस मामले में भोपाल स्तर पर चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि विज्ञप्ति जारी हो चुकी है तथा आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए 13 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है। निर्धारित समय-सीमा में प्राप्त सभी दस्तावेजों एवं अभ्यावेदनों की नियमानुसार जांच की जाएगी। यदि संबंधित अभ्यर्थी नियमों के अनुरूप पात्र पाई जाती है तो आगे की पदोन्नति प्रक्रिया में नियमानुसार विचार किया जाएगा।
हालांकि भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए आरोपों, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा कथित वॉइस रिकॉर्डिंग के संबंध में विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पारदर्शिता की मांग, वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी निगाहें
लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बाद कर्मचारियों और अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति, पदोन्नति और नियमितीकरण जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता, स्पष्ट दिशा-निर्देश और समयबद्ध निर्णय आवश्यक हैं। अब निगाहें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। यदि विभागीय चर्चाएं और लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं तो उनका स्पष्ट खंडन सामने आना चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।




